कर्म पर अनमोल विचार और कथन |Quotes about Work (Karma) in Hindi

कर्म शब्द व्यापक अर्थ को रखता है। कर्म करने से शरीर स्वस्थ रहता है। दुनिया में आए है तो जीना ही पड़ेगा और जीने के लिए रोटी कपड़ा मकान अनिवार्य हैं। और इनकी पूर्ति के लिए कर्म करना अत्यावश्यक है। आइये आज हम कर्म के बारे में महापुरुषों के द्वारा कहे गए 10 बेस्ट अनमोल विचार जानते हैं। जो निश्चित तोर पर आपकी जिंदगी में आत्मविश्वास भर देंगे।

“कर्म ही धर्म है,” इसलिए हमें कर्म करते जाना चाहिए फल अपने आप हमें मिलेगा। इस दुनिया में जितने भी लोग सफल हुए हैं सब लोग अपने कर्म के लिए ही हुए हैं।
—भगवान श्री कृष्ण


इस धरती पर कर्म करते हुए सौ साल तक जीने की इच्छा रखो, क्योंकि कर्म करने वाला ही जीने का अधिकारी है। जो कर्मनिष्ठा छोड़कर भोगवृत्ति रखता है, वह मृत्यु का अधिकारी बनता है।
—वेद


कर्म करना बहुत अच्छा है, पर वह विचारो से आता है, इसलिए अपने मस्तिष्क को उच्च विचारो एवं उच्चतम आदर्शो से भर लो, उन्हें रात-दिन अपने सामने रखो, उन्हीं में से महान कर्मो का जन्म होगा।
—महर्षि अरविन्द


जैसे फूल और फल किसी की प्रेरणा के बिना ही अपने समय पर वृक्षों में लग जाते है, उसी प्रकार पहले के किये हुए कर्म भी अपने फल-भोग के समय का उल्लंघन नहीं करते।
—वेदव्यास (महा.)

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जो व्यक्ति छोटे-छोटे कर्मो को भी ईमानदारी से करता है, वही बड़े कर्मो को भी ईमानदारी से कर सकता है।
—सैमुअल


देहि शिवा बर मोहि इहै, शुभ करमन तें कबहूँ न टरौं। जब जाइ लरौं रन बीच मरौं, या रण में अपनी जीत करौं ॥
—गुरू गोविन्द सिंह


फल मनुष्य के कर्म के अधीन है, बुद्धि कर्म के अनुसार आगे बढ़ने वाली है, तथापि विद्वान और महात्मा लोग अच्छी तरह विचारकर ही कोई काम करते है।
—चाणक्य


अभाग्य से हमारा धन, नीचता से हमारा यश, मुसीबत से हमारा जोश, रोग से हमारा स्वास्थ्य, मृत्यु से हमारे मित्र हमसे छीने जा सकते है, किन्तु हमारे कर्म मृत्यु के बाद भी हमारा पीछा करेंगे।
—कोल्टन


इस संसार में कोई मनुष्य स्वभावतः किसी के लिए उदार, प्रिय या दुष्ट नहीं होता। अपने कर्म ही मनुष्य को संसार में गौरव अथवा पतन की ओर ले जाते है।
—नारायण पण्डित


खेल में हम सदा ईमानदारी का पल्ला पकड़कर चलते है, पर अफ़सोस है कि कर्म में हम इस ओर ध्यान तक नहीं देते।
—रस्किन

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